दोस्ताें ने कहा, चुनावों का सीजन है, सुनाइये कुछ चटपटा मजेदार मैंने कहा, ठीक है, लीजिये अब की बार, सांसदों का अचार।। सबसे पहले कुछ पढ़े लिखे, स्वस्थ मानसिकता, न्यायप्रियता अौर संतुलित आचार व्यवहार वाले सांसद लायें, ताकि आने वाले पांच सालों तक भ्रष्टाचार की फफूंदी और लालच की हवा उन्हें छू भी न पाये।। अच्छे सांसद चुनने के लिए अनुभव का चश्मा और ई0वी0एम0 का उचित प्रयोग, कारगर सिद्ध होगा, परन्तु दूध को फटते और नेता को बिगड़ते देर नहीं लगती इसलिये 50-50% तो रिस्क होगा।। चलिए सांसद आपने चुन लिये, प्रजातंत्र के कुछ सपने बुन लिये, अब प्रारंभ होता है संरक्षण का असली काम अचार बनाना भी है जिसका दूजा नाम।। बेईमानी की डंडिया अगर दिखाई दें, तो आचार संहिता वाले चाकू से छांट दें। अपराधों के दाग दिखाई दें, तो पहले ही डस्ट बिन में डाल दें। स्वार्थ की महक आ रही हो तो एक बार आत्ममंथन के सिरके में डुबो दें, और बन्दे का पिछला रिकार्ड देखना हो तो आर0टी0आई0 की सुइयां चुभो दें।। दिखाई दें, अगर धर्म व जाति के दाग, और सुनाई दे अगर मक्कारी का राग, तो समझ लीजिए ऐसे स...