चुनावी राग में बसन्त

इस बार फ़रवरी में 

अपना प्रदेश करने पूरे 

21 बसंत जा रहा है,

बाली है उमरिया 

दहलीज़ पर 22 की 

चुनावी गीत प्रजातंत्र गा रहा है ॥

कोंपल बदल रही है,

शाखें वही पुरानी,

जिसको देखो अन्यत्र जा रहा है॥

चालें सभी पुरानी 

टोटके नए चलेंगे,

कुरसी को जो बचाये 

वहीं मंत्र भा रहा है॥

मत वालों से कह दो 

सँभालकर बटन दबाएँ,

चुनावी राग में झूमता 

बसंत आ रहा है ।


बीना जोशी 'हर्षिता'

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